आज के दौर में सुंदरता को अक्सर चेहरे, शरीर और बाहरी बनावट से जोड़कर सब देखते है। सोशल मीडिया, फिल्टर और फैशन ट्रेंड्स ने सुंदरता को एक नकली परिभाषा बना दी है। सुंदरता ( Sundarta) एक ऐसा शब्द हैं जिसे अक्सर ही लोग शारीरिक सुंदरता से जोड़कर देखते है। हालाँकि सुंदरता एक विस्तृत शब्द हैं जिसका अर्थ सिर्फ शरीर की सुंदरता कतई नहीं हैं। वास्तव में सुंदरता देखने वालों की दृष्टि में होती हैं। ब्रह्माण्ड में पायें जानी वाली हर एक वस्तु, कीट पतंग, जीव जंतु सुंदर हो सकते हैं। ये भी हो सकता हैं की कोई वस्तु आपको सुन्दर दिखाई दे रही हो लेकिन औरों को नहीं , इसीलिए कहा गया हैं की असली सुंदरता देखने वालों की दृष्टि में होती हैं। किसी चीज को सुन्दर बनाती हैं आपका दृष्टिकोण आपकी लालसा आपका लक्ष्य या किसी विषय के प्रति आपकी दिलचस्पी। लेकिन क्या यही असली सुंदरता है? आइए जानते हैं कि वास्तव में असली सुंदरता क्या होती है और क्यों यह बाहरी सुंदरता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
असली सुंदरता क्या है? | Asli Sundarta Kya Hai
Asli Sundarta Kya Hai: असली सुंदरता वह होती है जो इंसान के मन, विचार, व्यवहार और संस्कारों में दिखाई देती है। यह वो सुंदरता है जो समय के साथ और निखरती जाती है, न कि उम्र के साथ खत्म होती है। हर व्यक्ति का देखने का नजरिया अलग होता हैं किसी को पतले दुबले व्यक्ति पसंद है। तो किसी को मोटे, ये तो आपके देखने के नजरिये पे निर्भर करता हैं। तो हम इस तरह सौंदर्य या सुंदरता को परिभाषित कर सकते हैं। किसी वस्तु या व्यक्ति के वो गुण जो हमें सिर्फ आँखों से ही नहीं बल्कि अपने गुणों से आंतरिक तौर पे प्रभावित करती हैं उसे ही असली सुंदरता (Sundarta) कहाँ जाता हैं।
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असली सुंदरता किन बातों से बनती है?
अच्छी सुंदरता निम्लिखित बातो से बनती है :-
1. अच्छा स्वभाव
दयालुता, सच्चाई और विनम्रता किसी भी इंसान को सुंदर बनाती है।
2. आत्मविश्वास
जो व्यक्ति खुद से खुश रहता है और आत्मविश्वास रखता है, वह अपने आप में सुंदर लगता है।
3. सकारात्मक सोच
हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना इंसान के व्यक्तित्व को निखार देता है।
4. दूसरों के प्रति सम्मान
जो दूसरों की भावनाओं को समझता है, वही सच में सुंदर कहलाता है।
असली सुंदरता के प्रकार क्या है – Sundarta के प्रकार
अब तक मैंने आपको बताया की असली सुंदरता क्या है। सुंदरता (Sundarta) को कई और नामों से भी जानते हैं जैसे की ख़ूबसूरती, हुस्न, सौंदर्य, सुंदरता, मनोहरता, मनमोहक, सुहावनापन आदि। चलिए अब मैं आपको बताती हूँ की सुंदरता या सौंदर्य के वास्तव में कितने प्रकार होते हैं।
1.बाह्य सौंदर्य (बाहरी सुंदरता)
बाह्य सौंदर्य (Sundarta) अर्थात इंद्रियों को आन्दित करने वाले वो गुण जो प्रकृति प्रदत्त होते हैं। जैसे किसी स्त्री की शारीरिक सुंदरता (Sundarta), किसी वस्तु का तेज, काली आँखें, घुंघराले बाल, सूर्यास्त का समय, फूलों की गंध आदि। हालाँकि बाहरी सुंदरता हमेशा नहीं रहती हैं। एक समय आता हैं जब ये खुद नष्ट हो जाते हैं। हालाँकि दोनों का अपना अपना महत्त्व हैं।
2.आंतरिक सौंदर्य
सुंदरता प्रकृति द्वारा दिया गया उपहार हैं लेकिन इसके ठीक विपरीत आंतरिक सुंदरता हम स्वयं ही विकसित करते हैं। आंतरिक सुंदरता (Sundarta) हमारे अच्छे कर्म ,गुण और संस्कारों से आती हैं। आप चाहे दिखने में कितने भी खुबसुरत हो लेकिन जब आपके कर्म और संस्कार अच्छे नहीं होंगे तब तक आपकी खूबसूरती नहीं दिखेगी। एक कुरूप व्यक्ति भी अच्छे कर्म करके अपने गुणों के द्वारा समाज में और देश में अपना नाम ऊंचा कर सकता हैं। जब आपके कर्म अच्छे होते हैं तो आपके रंग रूप का कोई महत्त्व नहीं रह जाता हैं।
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निष्कर्ष
असली सुंदरता चेहरे में नहीं, बल्कि चरित्र में होती है। जो इंसान अंदर से सुंदर होता है, वही हर दिल में जगह बना लेता है। इसलिए खुद को बाहर से नहीं, अंदर से बेहतर बनाने पर ध्यान दें। सुंदरता का वास्तविक अर्थ वस्तु या व्यक्ति के गुणों एवं कर्मों से होता हैं। आप तभी सुंदर दिखेंगे जब आपके अंदर भरपूर आत्मविश्वास होगा। अपने गुणों से कोई भी व्यक्ति खुद को सुन्दर बना सकता हैं बस आवश्यक हैं तो अच्छे कर्म करने की। जब आप क्रोध, घृणा जैसे विकारों से दूर होते हैं तब स्वयं ही आपकी असली सुंदरता बढ़ने लगती हैं। दोस्तों मुझे उम्मीद हैं की आप असली “सुंदरता क्या है” (Asli Sundarta Kya Hai) इस प्रश्न का उत्तर आपको मिल गया होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.









